Radhika Yadav Tennis Player का सपना दिल टूटने के साथ टूटा
उभरती Radhika Yadav Tennis Player, उम्र 25, को 10 जुलाई को गुरुग्राम में उनके पिता ने गोली मार दी। उनके सपने और जीवन एक झटके में खत्म हो गए—यह है उनकी कहानी।
कहानी क्या है
उभरती टेनिस स्टार का जीवन घर में ही समाप्त हो गया
राधिका यादव, जन्म 23 मार्च, 2000, गुरुग्राम की राज्य और राष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी थीं। उन्होंने ITF डबल्स रैंकिंग में 113वां स्थान हासिल किया था और सेक्टर 57 में अपना खुद का अकादमी शुरू किया था। 10 जुलाई 2025 को, जब वह नाश्ता बना रही थीं, उनके पिता दीपक यादव ने आर्थिक निर्भरता की अफवाहों के बाद उनसे बहस की। लगभग 10:30 बजे उन्होंने पाँच लाइसेंसी .32-बोर की गोलियाँ चलाईं, जिनमें से तीन राधिका की पीठ में लगीं—उनकी तुरंत मृत्यु हो गई। यह दुखद घटना ने भारत को झकझोर दिया और परिवार के दबाव, पुरुष अहंकार और घरेलू हिंसा पर कड़े सवाल खड़े किए।
आर्थिक दबाव
पिता ₹15–17 लाख मासिक आमदनी पर निर्भर थे
दीपक यादव कथित रूप से किराये की संपत्तियों और एक फार्महाउस से ₹15–17 लाख प्रति माह कमा रहे थे। अपनी आय होने के बावजूद, ग्रामीणों ने उन पर बेटी की अकादमी की कमाई पर निर्भर होने का मज़ाक उड़ाया। इससे समय के साथ उनके भीतर नाराज़गी बढ़ी। उनकी आमदनी बताती है कि राधिका केवल एक खिलाड़ी नहीं थीं—वह परिवार की प्राथमिक कमाने वाली बन गई थीं। यह वैसा ही है जब परिवार में कोई सदस्य वित्तीय संतुलन बदल देता है और बाकी लोग तालमेल नहीं बना पाते। दीपक के मामले में, अहंकार और सामाजिक शर्म ने एक दुखद और घातक मोड़ ले लिया।
अकादमी विवाद
बेटी की स्वतंत्रता पिता के अहंकार से टकरा गई
राधिका ने अपनी टेनिस अकादमी तब शुरू की जब मार्च 2024 में कंधे की चोट के कारण उनका खेल रुका। दीपक ने बार-बार विरोध किया और कहा कि वो इसे बंद कर दें। उन्होंने कोचिंग और सोशल मीडिया के ज़रिए राधिका की बढ़ती स्वतंत्रता को एक खतरा समझा। उन्होंने पुलिस को बताया कि वज़ीराबाद में लोग उनका मज़ाक उड़ाते थे और कहते थे कि वह “बेटी की कमाई पर जीते हैं।” यह लंबी खिंची हुई तनाव की स्थिति अंततः त्रासदी में बदल गई। दूसरों को मार्गदर्शन देने का सपना हिंसा का कारण बन गया—जब निर्णय किसी कमजोर अहंकार को चोट पहुँचाते हैं, तो उसकी कीमत जान भी हो सकती है।
🔎 त्वरित तथ्य बॉक्स
- 🎾 उम्र: 25 (जन्मतिथि 23 मार्च 2000)
- 📍 स्थान: सुषांत लोक, सेक्टर 57, गुरुग्राम
- 🏅 ITF रैंकिंग: डबल्स #113
- 🔫 गोली दागी गईं: 5 (3 उनकी पीठ में लगीं)
- 💰 पिता की आमदनी: ₹15–17 लाख/माह
सोशल मीडिया चर्चा
इंस्टाग्राम reels से अफवाहें फैलीं, कारण नहीं
प्रारंभिक मीडिया रिपोर्ट्स ने यह सुझाव दिया कि उनकी इंस्टाग्राम reels या संगीत वीडियो ने घटना को जन्म दिया। लेकिन पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि मूल कारण अकादमी का विवाद और दीपक की निर्भरता की भावना थी। राधिका 2024 में ‘Karwaan’ नामक एक संगीत वीडियो में LLF Records के तहत नज़र आई थीं। सोशल मीडिया ने ड्रामा जरूर बढ़ाया, लेकिन यह असली वजह नहीं थी। यह दिखाता है कि कितनी जल्दी अटकलें सच्चाई को ढक सकती हैं—बिना पुष्टि वाले दावे किसी त्रासदी का असर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह बढ़ा सकते हैं।
पारिवारिक त्रासदी
हत्या तब हुई जब माँ और चाचा हस्तक्षेप नहीं कर पाए
जब गोलियों की आवाज़ आई करीब 10:30 बजे, राधिका की माँ नीचे थीं और बाद में उन्होंने बताया कि उन्हें बुखार था और वह ऊपर अपने कमरे में बंद थीं। उनके चाचा कुलदीप रसोई में दौड़े, उन्हें खून से लथपथ पाया और उन्हें एशिया मारिंगो हॉस्पिटल सेक्टर 56 ले जाने की कोशिश की। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह पूरी घटना परिवार के दोमंज़िला घर में हुई, जहाँ केवल करीबी रिश्तेदार ही मौजूद थे—यह याद दिलाने वाली घटना है कि दुख सबसे सुरक्षित जगहों में भी दस्तक दे सकता है।
जांच की स्थिति
पिता हिरासत में, सभी संभावित कारणों की जांच जारी
दीपक यादव ने स्वीकार किया और उन्हें गिरफ्तार किया गया, फिर उन्हें हिरासत और रिमांड सुनवाई के लिए भेजा गया। एफआईआर कुलदीप की शिकायत पर सेक्टर 56 पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई। पुलिस ने बताया कि वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिनमें सोशल मीडिया, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक संबंध शामिल हैं। जांच की निष्पक्षता मायने रखती है—केवल गहन जांच से ही न्याय संभव हो सकता है और ऐसे ही जहरीले मर्दानगी और पारिवारिक टूट-फूट से जन्मी त्रासदियों को रोका जा सकता है।
समुदाय की प्रतिक्रिया
टेनिस जगत स्तब्ध, मानसिक स्वास्थ्य पर बात बढ़ी
राधिका की मृत्यु ने खेल समुदाय को हिला दिया। राज्य स्तर के खिलाड़ी, कोच और प्रशंसकों ने उन्हें “झकझोर देने वाली” और “सबसे प्यारी मुस्कान वाली” बताया, साथ ही खेलों में मानसिक स्वास्थ्य समर्थन बेहतर करने की मांग की। गुरुग्राम के स्थानीय लोगों ने घरेलू दबावों से एक प्रतिभाशाली जीवन बर्बाद होने पर दुख जताया। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि यह मामला पितृसत्ता, पुरुष असुरक्षा और घरेलू हिंसा पर कठोर प्रकाश डालता है। यह त्रासदी ऑनलाइन भावपूर्ण श्रद्धांजलियों को जन्म देने के साथ भारत में पारिवारिक संबंधों पर बातचीत भी शुरू कर गई—यह दिखाते हुए कि मानसिक स्वास्थ्य हर समुदाय में प्राथमिकता बनना चाहिए।
अंतिम अपील
साहस की विरासत जागरूकता और बदलाव की मांग करती है
राधिका का जीवन और मौत हमें याद दिलाते हैं कि सशक्तिकरण कमजोर अभिमान को चुनौती दे सकता है। उनकी अकादमी, स्वतंत्रता और सोशल मीडिया उपस्थिति सकारात्मक कदम थे—लेकिन पितृसत्ता के नियमों से टकराव ने उनकी जान ले ली। जैसा कि दीपक ने कबूल किया, “जब लोगों ने कहा कि मैं उसकी कमाई पर जीता हूँ, मैं सहन नहीं कर पाया,” यह दिखाता है कि शब्द किस तरह जानलेवा कार्रवाई तक ले जा सकते हैं। आइए राधिका को याद करें उनके साहस को सम्मान देकर—लड़कियों की महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करें और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। आवाज उठाइए, मदद दीजिए और बदलाव के लिए आगे आइए—क्योंकि कोई सपना घर में खत्म नहीं होना चाहिए।
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