जापान के क्योटो में Gion Matsuri Festival कैसे मनाया जाता है?

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क्योटो का गिओन मात्सुरी Gion Matsuri जुलाई में लाता है भव्य झांकियाँ, लालटेन से रोशन रातें, स्ट्रीट फूड और प्राचीन अनुष्ठान। एक सांस्कृतिक यात्रा जो दिल छू जाए।


Table of Contents

उत्सव की भावना
शिंतो परंपरा और 1,150 साल पुराना आध्यात्मिक आकर्षण

गिओन मात्सुरी Gion Matsuri क्योटो का सबसे बड़ा शिंतो उत्सव है, जो 1 से 31 जुलाई तक यासाका श्राइन में होता है। इसकी शुरुआत 869 ईस्वी में महामारी से लड़ने के लिए हुई थी और आज भी यह गहरी श्रद्धा से मनाया जाता है। हर साल यह 10 लाख से अधिक लोगों को आकर्षित करता है। स्थानीय मोहल्ले विशाल झांकियाँ (yamaboko) बनाते हैं, जो 25 मीटर ऊँची और 12 टन वजनी होती हैं। यह पूरा महीना भक्ति, आनंद और विरासत का संगम है—ऐसा लगता है जैसे शहर हर ढोल की थाप और हर लालटेन की रोशनी से अपने अतीत को प्रेमपत्र लिख रहा हो।


झांकी शोभायात्रा
17 और 24 जुलाई को अद्भुत yamaboko परेड

झांकियाँ इस उत्सव की जान हैं—पहली परेड 17 जुलाई को (Saki Matsuri) और दूसरी 24 जुलाई को (Ato Matsuri) होती है। पहली में 23 और दूसरी में 11 झांकियाँ होती हैं, जो क्योटो की सड़कों को चलते-फिरते संग्रहालय में बदल देती हैं। ये लकड़ी, रेशम और सोने की पत्तियों से सजी होती हैं और पारंपरिक पोशाक पहने लोग इन्हें रस्सियों से खींचते हैं। Gion-bayashi की धुन—बांसुरी, ढोल और घंटियों की ताल—हर गली को जादुई बना देती है।


लालटेन रातें
गर्मियों की रातों में क्योटो बनता है रोशनी का शहर

14 से 16 जुलाई और फिर 21 से 23 जुलाई तक, परेड से पहले की रातें Yoiyama कहलाती हैं—जहाँ लालटेन, स्ट्रीट फूड, और संगीत से सजी गलियाँ होती हैं। शाम 6 से रात 11 बजे तक लोग yukata पहनकर घूमते हैं, takoyaki, yakitori और बर्फ के गोले जैसे स्वादिष्ट व्यंजन खाते हैं। ऐतिहासिक घर Byobu Matsuri के तहत अपनी पुरानी पेंटिंग्स और विरासत की चीजें दिखाते हैं। यह जापान का अपना दिवाली जैसा त्योहार लगता है—नरम रोशनी, मुस्कानें और एक रात जो कभी खत्म न हो।


🔎 त्वरित तथ्य बॉक्स

  • 🗓 उत्सव की तिथियाँ: 1–31 जुलाई
  • 🏮 लालटेन रातें: 14–16 और 21–23 जुलाई
  • 🎎 कुल झांकियाँ: 34 (दो परेड में)
  • 🚶 वार्षिक आगंतुक: 10 लाख से अधिक
  • 📍 स्थान: गिओन, क्योटो (Yasaka Shrine)


शिल्प कौशल
नाखून रहित झांकियाँ, स्थानीय कारीगरों की कला

10–13 और 18–21 जुलाई के बीच, मोहल्ले की टीमें बिना कील के झांकियाँ बनाती हैं—सिर्फ रस्सी, बांस और लकड़ी के जोड़। दर्शक इस प्रक्रिया को देख सकते हैं या थोड़ी फीस देकर झांकी पर चढ़ भी सकते हैं। ये झांकियाँ 3–4 दिन में बनती हैं और हर एक किसी समुदाय की आत्मा को दर्शाती है। यह ऐसा है जैसे 1,000 साल पुराने नक्शों से कोई LEGO मास्टरपीस बन रहा हो।


शुद्धिकरण अनुष्ठान
शिंतो परंपराओं से शहर और आत्मा की शुद्धि

10 जुलाई को पवित्र mikoshi (चल मंदिर) को कामो नदी में धोया जाता है—इसे Mikoshi Arai कहते हैं। फिर 17 और 24 जुलाई को तीन mikoshi शहर में घुमाए जाते हैं (Shinkō-sai) ताकि आशीर्वाद फैल सके। 31 जुलाई को Eki Shrine में Purification Rite होता है, जिसमें स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। ये अनुष्ठान गिओन मात्सुरी को आध्यात्मिक गहराई देते हैं।


पारंपरिक संस्कृति

संगीत, yukata और एकता से सजी सांस्कृतिक झलक

यहाँ संस्कृति केवल दिखाई नहीं जाती—जी जाती है। बच्चे से बुजुर्ग तक हर कोई भाग लेता है। yukata पहनकर लोग Gion-bayashi की धुन पर नाचते-गाते हैं। हर साल 2,000 से अधिक स्थानीय स्वयंसेवक शामिल होते हैं। यह भारत के नवरात्रि या दुर्गा पूजा जैसा है—हर कोई किसी न किसी रूप में भागीदार होता है।


पर्यटक सुझाव
गर्मी, भीड़ और रस्मों से निपटने के टिप्स

जुलाई में क्योटो गर्म होता है—तापमान 35°C तक जाता है और भीड़ सुबह 9 बजे से लगने लगती है। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें क्योंकि सड़कें बंद हो सकती हैं। पानी, पंखा और नकद साथ रखें—अधिकांश स्टॉल कार्ड नहीं लेते। होटल 2–3 महीने पहले बुक करें, खासकर अगर आप Gion या Shijo Street के पास रहना चाहते हैं। yukata किराए पर लेना न भूलें—तस्वीरों के लिए बढ़िया और स्थानीय लोग इसे पसंद करते हैं।


सांस्कृतिक सीख
भारत क्योटो की जीवित विरासत से क्या सीख सकता है

गिओन मात्सुरी दिखाता है कि प्राचीन उत्सव भी आधुनिक हो सकते हैं। 1,150 साल पुरानी परंपरा के बावजूद, क्योटो इसे श्रद्धा और पर्यटन दोनों के साथ निभाता है। भारत में भी रथ यात्रा या त्रिशूर पूरम जैसे उत्सव हैं—अगर उन्हें इसी तरह सामुदायिक और पर्यावरणीय संतुलन के साथ मनाया जाए, तो यह एक बड़ी जीत होगी।


उत्सव और अर्थव्यवस्था
स्थानीय व्यापार, शिल्प और संस्कृति को बढ़ावा

गिओन मात्सुरी केवल आध्यात्मिक नहीं, आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय दुकानदार, yukata किराए वाले, कारीगर और होटल मालिक सभी को लाभ होता है। जुलाई में यह उत्सव क्योटो की अर्थव्यवस्था में लगभग ¥15 अरब (₹900 करोड़) का योगदान देता है। यह दिखाता है कि परंपरा और व्यापार साथ चल सकते हैं।


फिर लौटी खुशी
महामारी के बाद परंपरा की वापसी

2023 में महामारी के बाद गिओन मात्सुरी की वापसी ने क्योटो की आत्मा को फिर से जगा दिया। 1.2 मिलियन से अधिक लोग आए, Yoiyama में रिकॉर्ड भीड़ रही और होटल बुकिंग 80% तक बढ़ गई। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं था—यह एक सांस्कृतिक आलिंगन था।


साथ मनाइए
क्योटो के गिओन मात्सुरी में शामिल हों—इतिहास और उम्मीद का उत्सव

चाहे आप यात्री हों, छात्र हों या उत्सव प्रेमी—गिओन मात्सुरी एक ऐसा अनुभव है जो दिल में बस जाता है। 25 मीटर ऊँची झांकियाँ, हाथ से बनी लालटेनें—हर चीज़ एक जीवित कहानी की तरह लगती है। जैसा एक स्वयंसेवक ने कहा, “गिओन को आप सिर्फ देखते नहीं—उसका हिस्सा बन जाते हैं।” तो अगली जुलाई के लिए क्योटो को अपनी सूची में जोड़िए—क्योंकि इस तेज़ दुनिया में गिओन हमें याद दिलाता है कि रुकना, मनाना और याद करना कितना सुंदर होता है।

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